रविवार, 30 अप्रैल 2017

अपेल माह के श्रेष्ठ हाइकु (दूसरी और अंतिम किश्त)

अप्रेल माह के श्रेष्ठ हाइकु (दूसरी और अंतिम किश्त)

धूप में धरा
है लगी दरकने
बढ़ा जो ताप
      - प्रदीप कुमार डाश (हाइगा)
थोड़ी सी छाया
श्वान सर छिपाए
कार के नीचे
      -विभा श्रीवास्तव (हाइगा)
कुचले पड़े
राह में जूही फूल
फैली खुशबू
       कैलाश कल्ला
चाँद सागर
आँखों आँखों का प्यार
उछाले ज्वार
      -रमेश कुमार सोनी
खुश होती माँ
सुन बच्चे का रोना
एक ही बार
      -राजीव गोयल
अंतस दुखी
मुख ओढ़े मुस्कान
वाह ! इंसान
     प्रियंका वाजपेयी
छनती धूप
जाली सा स्वरूप
धरें पत्तियाँ
    -प्रियंका वाजपेयी
पंखुरियों पे  \
मोती से चमकते
फूलों के आंसू
       -डा. रंजना वर्मा
नाश्ते की मेज़
सजी हैं दवाइयां
बुज़ुर्ग घर
       -राजीव गोयल
सालों से फंसी
दहेज़ की खूँटी में
बेटी  की हंसी
       -अभिषेक जैन
तपता सूर्य
खूब बिखेरे धूप
प्यासा जीवन
      -जितेन्द्र वर्मा
चाँद अकेला
लगा तारों का मेला
ढूँढे ठिकाना
       डा. रंजना वर्मा
रोशनी नहीं
दीयों की मोहताज
दिल रोशन
        -प्रियंका वाजपेयी
अकड़े नोट
नटखट चिल्लर
खिलखिलाए
       -प्रियंका वाजपेयी
चन्द्र वदन
घटाओं में छिपाती
फिरे चांदनी
      -डा. रंजना वर्मा
गोधूलि वेला
तपता दिनकर
झील में बैठा
      -विष्णु प्रिय पाठक
चन्द्र किरणें
पत्तियों से छनती
जाली बुनती
       -डा. रंजना वर्मा
नंगे हैं पाँव
सर पर तसला
धूप अपार
        -जितेन्द्र वर्मा
जेठ की गर्मी
कहीं नहीं दिखाती
कोई नरमी
        -निगम 'राज़'
बुझाता प्यास
कुँए का पानी ठंडा
गर्मी की हार
       -जितेन्द्र वर्मा
टीवी पे मैच
भिन्डी के संग, कटी
मेरी उंगली
       -विष्णु प्रिय पाठक
वस्तु से प्रेम
व्यक्ति का उपयोग
युग आज का
       -जितेन्द्र वर्मा
गोधूलि वेला
तपता दिनकर
झील में बैठा
       -विष्णु प्रिय पाठक
चली चीटियाँ
पंक्तिबद्ध होकर
सपरिवार
      -डा. रंजना वर्मा
बच्चों का स्वप्न
खेल-खलौने,अम्मा
प्यारी दुनिया
      -रमेश कुमार सोनी
गिराने न दो
सम्मान का सूचक
आँखों का पानी
       -डा. रंजना वर्मा
ताली बजाए
देख जलती चिता
मासूम बेटा
      -राजीव गोयल
क़र्ज़ तकाजा
किसान आत्म ह्त्या
बाँझ मौसम
      -रमेश कुमार सोनी
आतंकी गोली
बापू की तस्वीर पे
खून के छींटे
        -विष्णु प्रिय पाठक
मार के चोंच
गिरा गए बिजूका
साहसी कौवे
        -राजीव गोयल
दो बूंद जल
दे बदल दुनिया
दो हाथी बल
       -तुकाराम खिल्लारे
सुख, दुख श्री
गले न मिले कभी
पुश्तैनी बैरी
         -रमेश कुमार सोनी
दिन निकला
लोग घरों से भागे
पैसों के पीछे
        - रमेश कुमार सोनी
जल संकट
दहाड़ रही गर्मी
खामोश घाट
       -अभिषेक जैन
गया निगल
अंतस की वेदना
आँखों का जल
        -अभिषेक जैन
श्वास घुंघुरू
खनकते रहते
देह घर में
     -डा. रंजना वर्मा
सिर पे घडा
चिलचिलाती धूप
तलाशे पानी
      -सुशील शर्मा
जल का कल
यदि नहीं रक्षित
सब निष्फल
      -सुशील शर्मा
कैसा स्वराज
कैद है कबूतर
मुक्त है बाज़
     -सूर्य नारायण गुप्त
चाँद सितारों
आओ न किसी दिन
घर हमारे
     -सूर्य नारायण गुप्त
स्वप्न जो जगें
नैनों को मूंद लीजे
झरने न दें
       -प्रियंका वाजपेयी
गर्द जो जमें
ज़िंदगी को झाड दें
भरने न दें
        -प्रियंका वाजपेयी

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समाप्त
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2 टिप्‍पणियां:

  1. श्रेष्ठ हाइकु का चयन करना एक दुष्कर कार्य सदा से रहा है , आपने इसे बखूबी अंजाम दिया ,मार्गदर्शन देते रहते हैं ,बहुत धन्यवाद | सदर नमन . . .

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